जेस्टेशनल डायबिटीज़ से पीड़ित होने की संभावना
इसके 17 मिनट बाद अमरीकी राष्ट्रपति ने अगला ट्वीट किया, जिसमें हिंदुओं
का ज़िक्र किया. उन्होंने लिखा, "मुझे व्हाइट हाउस के रूज़वेल्ट रूम में दिवाली समारोह की मेज़बानी का सौभाग्य मिला. बहुत, बहुत ख़ास लोग!"
अमरीकी राष्ट्रपति के ट्विटर हैंडल पर हुई इस ग़फ़लत को ट्विटर यूजर्स ने पकड़ लिया और और उस पर चुटकियां लेना शुरू कर दिया.
सीएनएन के पत्रकार मनु राजू का कहना है कि ट्रंप ने दिवाली की बधाई देने के लिए दो नहीं, तीन कोशिशें की थीं, जिनमें से शुरुआती दो नाकाम रहीं. उन्होंने लिखा, "इससे पहले भी ट्रंप ने दिवाली की शुभकामनाओं वाला एक ट्वीट किया था, जिसमें उन्होंने हिंदुओं का ज़िक्र नहीं किया था. लेकिन वह ट्वीट उन्होंने डिलीट कर लिया. फिर उन्होंने एक और ट्वीट किया और उसमें भी हिंदुओं का ज़िक्र नहीं किया."
ट्विटर पर माकिन पन कैली लिखते हैं, "मुझे पक्का पता है कि उन्हें लगता है कि बौद्ध और हिंदू एक ही हैं."
लिसा जे यार्डे लिखती हैं, "कोई इन्हें बताएं कि दिवाली हिंदुओं का त्योहार है और इन्होंने उन्हीं का ज़िक्र नहीं किया. ये बिल्कुल वैसा ही है जैसे बिना ईसाइयों के क्रिसमस, अब समझे?"
जे कुमार लिखते हैं कि आपने अरबों हिंदुओं का अपमान किया है जिनके लिए ये एक धार्मिक अवकाश का दिन है. क्या व्हाइट हाउस में किसी के पास थोड़ा भी दिमाग है? विडंबना ये है कि अज्ञानता पर ज्ञान की जीत का जश्न मनाया जाता है.
इसी तरह दिवाली पर हिंदुओं का ज़िक्र न करने से कई लोगों ने आपत्तियां जताई हैं. बौद्ध, सिख और जैन दिवाली को मनाते ज़रूर है लेकिन यह हिंदुओं का प्रमुख त्योहार है. प्यू के सर्वे के मुताबिक, अमरीका में बीस लाख से भी ज़्यादा हिंदू हैं और 2020 तक उनकी संख्या बढ़कर 25 लाख तक पहुंच सकती है.
दिवाली समारोह के दौरान राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने भारत और अमरीका के रिश्तों को भी ज़िक्र किया.
उन्होंने कहा, "हम भारत के साथ बेहतर ट्रेड समझौते करना चाहते हैं लेकिन वो मोल-भाव में माहिर हैं. यक़ीनन वे इसमें सबसे अच्छे हैं. इसलिए हमें मेहनत करनी पड़ रही है, लेकिन कोशिश जारी है."
अमरीकी राष्ट्रपति ने अपने प्रशासन के क़रीब दो दर्जन भारतीय मूल के अमरीकी अधिकारियों को भी न्योता दिया था. इनमें अमरीका में भारतीय राजदूत नवतेज सिंह सारना और उनकी पत्नी डॉ. अविना सारना भी शामिल थीं.
व्हाइट हाउस में साल 2003 में पहली बार दिवाली समारोह हुआ था. तब जॉर्ज डब्ल्यू बुश अमरीका के राष्ट्रपति थे. लेकिन वह कभी ख़ुद इस समारोह में शामिल नहीं हुए. साल 2009 में बराक ओबामा अमरीका के पहले ऐसे राष्ट्रपति बने जिन्होंने ख़ुद व्हाइट हाउस में दिवाली समारोह में हिस्सा लिया.
बीते तीस सालों में मधुमेह पीड़ितों की संख्या में चार गुना वृद्धि हुई है.
डायबिटीज़ से पीड़ित लोगों को हार्ट अटैक (दिल का दौरा) और हार्ट स्ट्रोक (हृदयाघात) हो सकता है.
इसके साथ-साथ डायबिटीज़ से किडनी फेल और पैरों के निष्क्रिय होने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है.
लेकिन इसके बाद भी आम लोगों में इस बीमारी के लक्षणों, बचाव और कारणों को लेकर जागरुकता नहीं है.
जब हमारा शरीर खून में मौजूद शुगर की मात्रा को सोखने में असमर्थ हो जाता है तो ये स्थिति डायबिटीज़ को जन्म देती है.
दरअसल, हम जब भी कुछ खाते हैं तो हमारा शरीर कार्बोहाइड्रेट को तोड़कर ग्लूकोज़ में बदलता है.
इसके बाद पेंक्रियाज़ से इंसुलिन नाम का एक हारमोन निकलता है जो कि हमारे शरीर की कोशिकाओं को ग्लूकोज़ को सोखने का निर्देश देता है.
इससे हमारे शरीर में ऊर्जा पैदा होती है.
लेकिन जब इंसुलिन का फ़्लो रुक जाता है तो हमारे शरीर में ग्लूकोज़ की मात्रा बढ़ना शुरू हो जाती है.
डायबिटीज़ के कई प्रकार होते हैं लेकिन टाइप 1, टाइप 2 और गेस्टेशनल डायबिटीज़ से जुड़े मामलों की अधिक पाए जाते हैं.
टाइप 1 डायबिटीज़ में आपके पेंक्रियाज में हारमोन इंसुलिन बनना बंद हो जाता है. इससे हमारे खून में ग्लूकोज़ की मात्रा बढ़ने लगती है.
अब तक वैज्ञानिक ये पता लगाने में सफल नहीं हुए हैं कि ऐसा क्यों होता है.
लेकिन इसे आनुवंशिकता और वायरल इन्फेक्शन से जोड़कर देखा जाता है.
इससे पीड़ित लोगों में से लगभग दस फीसदी लोग टाइप 1 डाटबिटीज़ से पीड़ित होते हैं.
वहीं, टाइप 2 डायबिटीज़ में पेंक्रियाज में ज़रूरत के हिसाब से इंसुलिन नहीं बनता है या हारमोन ठीक से काम नहीं करता है.
टाइप 2 डायबिटीज़ इन लोगों को हो सकता है -
इसमें महिलाओं का शरीर उनके और बच्चे के लिए पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन बनाना बंद कर देता है.
अलग-अलग मानदंडों के आधार पर किए गए अध्ययनों में सामने आया है कि छह से 16 फीसदी महिलाओं के जेस्टेशनल डायबिटीज़ से पीड़ित होने की संभावना है.
अमरीकी राष्ट्रपति के ट्विटर हैंडल पर हुई इस ग़फ़लत को ट्विटर यूजर्स ने पकड़ लिया और और उस पर चुटकियां लेना शुरू कर दिया.
सीएनएन के पत्रकार मनु राजू का कहना है कि ट्रंप ने दिवाली की बधाई देने के लिए दो नहीं, तीन कोशिशें की थीं, जिनमें से शुरुआती दो नाकाम रहीं. उन्होंने लिखा, "इससे पहले भी ट्रंप ने दिवाली की शुभकामनाओं वाला एक ट्वीट किया था, जिसमें उन्होंने हिंदुओं का ज़िक्र नहीं किया था. लेकिन वह ट्वीट उन्होंने डिलीट कर लिया. फिर उन्होंने एक और ट्वीट किया और उसमें भी हिंदुओं का ज़िक्र नहीं किया."
ट्विटर पर माकिन पन कैली लिखते हैं, "मुझे पक्का पता है कि उन्हें लगता है कि बौद्ध और हिंदू एक ही हैं."
लिसा जे यार्डे लिखती हैं, "कोई इन्हें बताएं कि दिवाली हिंदुओं का त्योहार है और इन्होंने उन्हीं का ज़िक्र नहीं किया. ये बिल्कुल वैसा ही है जैसे बिना ईसाइयों के क्रिसमस, अब समझे?"
जे कुमार लिखते हैं कि आपने अरबों हिंदुओं का अपमान किया है जिनके लिए ये एक धार्मिक अवकाश का दिन है. क्या व्हाइट हाउस में किसी के पास थोड़ा भी दिमाग है? विडंबना ये है कि अज्ञानता पर ज्ञान की जीत का जश्न मनाया जाता है.
इसी तरह दिवाली पर हिंदुओं का ज़िक्र न करने से कई लोगों ने आपत्तियां जताई हैं. बौद्ध, सिख और जैन दिवाली को मनाते ज़रूर है लेकिन यह हिंदुओं का प्रमुख त्योहार है. प्यू के सर्वे के मुताबिक, अमरीका में बीस लाख से भी ज़्यादा हिंदू हैं और 2020 तक उनकी संख्या बढ़कर 25 लाख तक पहुंच सकती है.
दिवाली समारोह के दौरान राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने भारत और अमरीका के रिश्तों को भी ज़िक्र किया.
उन्होंने कहा, "हम भारत के साथ बेहतर ट्रेड समझौते करना चाहते हैं लेकिन वो मोल-भाव में माहिर हैं. यक़ीनन वे इसमें सबसे अच्छे हैं. इसलिए हमें मेहनत करनी पड़ रही है, लेकिन कोशिश जारी है."
अमरीकी राष्ट्रपति ने अपने प्रशासन के क़रीब दो दर्जन भारतीय मूल के अमरीकी अधिकारियों को भी न्योता दिया था. इनमें अमरीका में भारतीय राजदूत नवतेज सिंह सारना और उनकी पत्नी डॉ. अविना सारना भी शामिल थीं.
व्हाइट हाउस में साल 2003 में पहली बार दिवाली समारोह हुआ था. तब जॉर्ज डब्ल्यू बुश अमरीका के राष्ट्रपति थे. लेकिन वह कभी ख़ुद इस समारोह में शामिल नहीं हुए. साल 2009 में बराक ओबामा अमरीका के पहले ऐसे राष्ट्रपति बने जिन्होंने ख़ुद व्हाइट हाउस में दिवाली समारोह में हिस्सा लिया.
दुनियाभर में डायबिटीज़ एक ऐसी बीमारी के रूप में उभर रही है जो बेहद तेज़ी से बच्चों से लेकर युवाओं को अपना निशाना बना रही है.
विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक़, दुनिया भर में इस समय 42.2 करोड़ लोग डायबिटीज़ यानी मधुमेह से पीड़ित हैं. बीते तीस सालों में मधुमेह पीड़ितों की संख्या में चार गुना वृद्धि हुई है.
डायबिटीज़ से पीड़ित लोगों को हार्ट अटैक (दिल का दौरा) और हार्ट स्ट्रोक (हृदयाघात) हो सकता है.
इसके साथ-साथ डायबिटीज़ से किडनी फेल और पैरों के निष्क्रिय होने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है.
लेकिन इसके बाद भी आम लोगों में इस बीमारी के लक्षणों, बचाव और कारणों को लेकर जागरुकता नहीं है.
जब हमारा शरीर खून में मौजूद शुगर की मात्रा को सोखने में असमर्थ हो जाता है तो ये स्थिति डायबिटीज़ को जन्म देती है.
दरअसल, हम जब भी कुछ खाते हैं तो हमारा शरीर कार्बोहाइड्रेट को तोड़कर ग्लूकोज़ में बदलता है.
इसके बाद पेंक्रियाज़ से इंसुलिन नाम का एक हारमोन निकलता है जो कि हमारे शरीर की कोशिकाओं को ग्लूकोज़ को सोखने का निर्देश देता है.
इससे हमारे शरीर में ऊर्जा पैदा होती है.
लेकिन जब इंसुलिन का फ़्लो रुक जाता है तो हमारे शरीर में ग्लूकोज़ की मात्रा बढ़ना शुरू हो जाती है.
डायबिटीज़ के कई प्रकार होते हैं लेकिन टाइप 1, टाइप 2 और गेस्टेशनल डायबिटीज़ से जुड़े मामलों की अधिक पाए जाते हैं.
टाइप 1 डायबिटीज़ में आपके पेंक्रियाज में हारमोन इंसुलिन बनना बंद हो जाता है. इससे हमारे खून में ग्लूकोज़ की मात्रा बढ़ने लगती है.
अब तक वैज्ञानिक ये पता लगाने में सफल नहीं हुए हैं कि ऐसा क्यों होता है.
लेकिन इसे आनुवंशिकता और वायरल इन्फेक्शन से जोड़कर देखा जाता है.
इससे पीड़ित लोगों में से लगभग दस फीसदी लोग टाइप 1 डाटबिटीज़ से पीड़ित होते हैं.
वहीं, टाइप 2 डायबिटीज़ में पेंक्रियाज में ज़रूरत के हिसाब से इंसुलिन नहीं बनता है या हारमोन ठीक से काम नहीं करता है.
टाइप 2 डायबिटीज़ इन लोगों को हो सकता है -
- अधेड़ और वृद्ध लोग
- मोटे और शारीरिक श्रम न करने वाले युवा
- दक्षिण एशियाई देशों में रहने वाले लोग
इसमें महिलाओं का शरीर उनके और बच्चे के लिए पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन बनाना बंद कर देता है.
अलग-अलग मानदंडों के आधार पर किए गए अध्ययनों में सामने आया है कि छह से 16 फीसदी महिलाओं के जेस्टेशनल डायबिटीज़ से पीड़ित होने की संभावना है.
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